
आधार कार्ड (Aadhaar Card) आज भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डॉक्यूमेंट्स में से एक बन चुका है। सिम कार्ड खरीदने से लेकर बैंक खाता खोलने तक, हर जगह पहचान प्रमाण (Identity Proof) और पते के प्रमाण (Address Proof) के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। आधार में व्यक्ति की बायोमेट्रिक जानकारी जैसे फिंगरप्रिंट, नाम, पता और मोबाइल नंबर शामिल होते हैं।
ऐसे में अगर यह जानकारी गलत हाथों में चली जाए तो इसका दुरुपयोग गंभीर अपराधों में किया जा सकता है। इसलिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार से संबंधित अपराधों और उनसे जुड़ी सजा को लेकर सख्त प्रावधान किए हैं।
यह भी देखें: NSP Scholarship Online Apply: सरकार दे रही है सभी विद्यार्थियों को ₹75,000 की स्कॉलरशिप, यहां से करें आवेदन
क्यों जरूरी है आधार कार्ड की सुरक्षा?
आज के डिजिटल युग में डेटा की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। आधार कार्ड में मौजूद संवेदनशील जानकारी का गलत इस्तेमाल पहचान की चोरी (Identity Theft), फर्जीवाड़े और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था आधार का दुरुपयोग करती है या नियमों का उल्लंघन करती है, तो इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। UIDAI के नियमों के अनुसार आधार से जुड़े कुल 8 प्रमुख अपराधों की पहचान की गई है, जिन पर कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।
गलत जानकारी देना बन सकता है अपराध
अगर कोई व्यक्ति आधार बनवाते समय जानबूझकर गलत जनसांख्यिकीय (Demographic) या बायोमेट्रिक (Biometric) जानकारी देता है तो यह एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए आरोपी को 3 साल तक की जेल या ₹10,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
पहचान की नकल करने पर भी मिलेगी सजा
किसी अन्य व्यक्ति की आधार पहचान को नकल करके इस्तेमाल करने या उसकी जानकारी में फेरबदल करने की कोशिश करना भी अपराध है। इस स्थिति में भी 3 साल तक की सजा और ₹10,000 तक जुर्माने का प्रावधान है।
फर्जी तरीके से आधार एजेंसी होने का दावा करना
अगर कोई व्यक्ति या संस्था खुद को अधिकृत आधार पंजीकरण एजेंसी बताकर लोगों से जानकारी एकत्र करने का प्रयास करती है, तो उसे 3 साल की सजा या ₹10,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि यह अपराध कोई कंपनी करती है तो उस पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।
अनधिकृत रूप से जानकारी साझा करना
आधार पंजीकरण या प्रमाणीकरण के दौरान मिली जानकारी को किसी अनधिकृत व्यक्ति से साझा करना भी कानूनन अपराध है। इसके लिए व्यक्ति को 3 साल तक की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं, जबकि कंपनी के मामले में जुर्माना ₹1 लाख तक का हो सकता है।
डेटा रिपोजिटरी तक अनधिकृत पहुंच और हैकिंग
केंद्रीय पहचान डेटा रिपोजिटरी (CIDR) में अनधिकृत रूप से पहुंचने या इसे हैक करने की कोशिश करना गंभीर साइबर अपराध माना जाता है। इस अपराध के लिए 10 साल तक की सजा और न्यूनतम ₹10 लाख का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
डेटा में छेड़छाड़ भी अपराध की श्रेणी में
अगर कोई व्यक्ति या संस्था केंद्रीय पहचान डेटा रिपोजिटरी में स्टोर किए गए डेटा में छेड़छाड़ करता है तो इसके लिए 10 साल की जेल और ₹10,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह भी देखें: FD vs NSC: क्या आप जानते हैं? 7.5% ब्याज वाली FD, 7.7% वाले NSC से ज्यादा मुनाफा देती है, जानें कैसे!
अनधिकृत पहचान सत्यापन का दुरुपयोग
अगर कोई ऑफलाइन वेरिफिकेशन यूनिट या अनुरोधकर्ता इकाई किसी व्यक्ति की पहचान संबंधी जानकारी का अनधिकृत उपयोग करती है, तो इस पर 3 साल तक की जेल या ₹10,000 का जुर्माना हो सकता है। कंपनी के मामले में यह जुर्माना ₹1 लाख तक हो सकता है।
अन्य अपराधों पर सामान्य सजा का प्रावधान
अगर कोई ऐसा अपराध होता है जो UIDAI अधिनियम में स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट नहीं है, तब भी उस पर कार्रवाई हो सकती है। व्यक्ति के लिए 3 साल तक की सजा या ₹25,000 तक का जुर्माना तय किया गया है, जबकि कंपनी के लिए यह ₹1 लाख तक हो सकता है।
क्यों बढ़ रही हैं आधार से जुड़ी घटनाएं?
डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ आधार का दायरा भी बढ़ा है। आज कई सरकारी और निजी सेवाओं में आधार की अनिवार्यता है। ऐसे में साइबर अपराधी (Cyber Criminals) इसे एक आसान लक्ष्य मानते हैं। फर्जी पहचान से लेकर वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) तक, आधार की मदद से कई गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश की जाती है।
यह भी देखें: Solar Rooftop Subsidy Yojana: 40% सब्सिडी पर लगेगा सोलर पैनल, आवेदन फॉर्म भरना शुरू करें!
UIDAI कैसे करता है निगरानी?
UIDAI द्वारा संचालित सेंट्रल सिस्टम आधार से जुड़े सभी गतिविधियों की निगरानी करता है। कोई भी असामान्य गतिविधि होने पर अलर्ट जारी किया जाता है और संबंधित एजेंसी या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। UIDAI समय-समय पर लोगों को जागरूक भी करता है कि वे अपने आधार को सुरक्षित रखें और किसी से भी अपनी जानकारी साझा न करें।