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अब ट्रैफिक रूल तोड़ना पड़ेगा महंगा! दोगुना हो सकता है इंश्योरेंस प्रीमियम, DL रद्द होने का भी खतरा

सरकार ट्रैफिक चालान नियमों को कड़ा बनाकर रोड एक्सीडेंट में कमी लाने की दिशा में कदम उठा रही है। चालान पेंडिंग रहने पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द और बीमा प्रीमियम बढ़ाने की योजना है। यह उपाय देश में Road Safety को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे हैं।

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अब ट्रैफिक रूल तोड़ना पड़ेगा महंगा! दोगुना हो सकता है इंश्योरेंस प्रीमियम, DL रद्द होने का भी खतरा
Traffic E-Challan

भारत में Road Accident की गंभीर समस्या को देखते हुए सरकार अब ट्रैफिक ई-चालान नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी में है। ड्राइविंग लाइसेंस (DL) पर खतरे और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ाने जैसे उपायों के जरिए सरकार न सिर्फ Road Safety को मजबूत करना चाहती है, बल्कि चालान की रिकवरी दर को भी सुधारना चाहती है।

भारत में Road Accident के हालात और सरकार की चिंता

भारत में हर दिन औसतन 1263 सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 474 लोगों की जान चली जाती है। हर घंटे करीब 55 दुर्घटनाएं होती हैं। इन आंकड़ों को कम करना सरकार की बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। Road Transport Ministry के अनुसार, अगर लोग ट्रैफिक नियमों को गंभीरता से लेंगे, तभी Road Safety बेहतर हो सकेगी। इसी सोच के तहत सरकार अब चालान न भरने पर DL Suspension जैसे कड़े कदम उठाने जा रही है।

नए नियम: चालान न भरने पर जब्त हो सकता है DL

सरकार के प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति तीन महीने के भीतर अपना ई-चालान (E-Challan) नहीं भरता, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द (DL Cancel) किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि एक फाइनेंशियल ईयर में किसी के नाम तीन चालान दर्ज हैं, तो उसका DL कम से कम तीन महीने के लिए जब्त हो सकता है। यह नियम उन लोगों को लक्षित कर रहा है जो बार-बार नियमों की अनदेखी करते हैं।

बढ़ सकता है वाहन बीमा का प्रीमियम

चालान की रिकवरी दर फिलहाल केवल 40% के आसपास है, यानी अधिकांश लोग ई-चालान भरते ही नहीं हैं। सरकार इस व्यवहार को बदलने के लिए चालान और Vehicle Insurance Premium को आपस में जोड़ने पर विचार कर रही है। जिन लोगों के नाम पिछली वित्तीय वर्ष में दो या अधिक लंबित चालान होंगे, उन्हें बीमा के लिए अधिक प्रीमियम देना पड़ सकता है। यह कदम वाहन मालिकों को समय पर चालान भरने की दिशा में प्रेरित करेगा।

केवल 33% वाहनों के पास है Third Party Insurance

हालांकि भारत में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है, फिर भी केवल 33% वाहनों ने ही यह बीमा करवाया है। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या Two-Wheeler Owners की है, जो या तो इंश्योरेंस से बचते हैं या समय पर रिन्यू नहीं करवाते। इससे न केवल दुर्घटनाओं के बाद मुआवजा देना मुश्किल होता है, बल्कि Road Safety का इकोसिस्टम भी कमजोर होता है।

2025 तक Road Accident में 50% की कटौती का लक्ष्य

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में ऐलान किया कि सरकार का उद्देश्य 2025 तक देश में सड़क हादसों और इनमें होने वाली मौतों की संख्या को 50% तक कम करना है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो 2023 से 2025 के बीच करीब 6 से 7 लाख लोगों की जान सड़क हादसों में जा सकती है। इसलिए सरकार की रणनीति अब और अधिक सख्त और टेक्नोलॉजी आधारित होगी।

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