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CNG-PNG हो सकती है महंगी! केंद्र सरकार के फैसले से जेब पर बढ़ेगा बोझ – जानिए पूरी डिटेल

सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से APM गैस की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे देशभर में CNG और PNG महंगी हो सकती है। यह गैस बिजली, उर्वरक और वाहन ईंधन में इस्तेमाल होती है। अधिकतम कीमत को बढ़ाकर 6.75 डॉलर प्रति यूनिट किया गया है जो मार्च 2026 तक लागू रहेगी। यह निर्णय आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है।

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CNG-PNG हो सकती है महंगी! केंद्र सरकार के फैसले से जेब पर बढ़ेगा बोझ – जानिए पूरी डिटेल
Increase in prices of CNG-PNG

1 अप्रैल से देशभर में पीएनजी और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। यह इज़ाफा सरकार द्वारा एडमिनिस्टर्ड प्राइसिंग मैकेनिज्म (APM) के तहत आने वाले पुराने क्षेत्रों से उत्पादित नेचुरल गैस की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के कारण हुआ है। इन क्षेत्रों से मिलने वाली गैस का उपयोग खासतौर पर CNG, PNG, बिजली और उर्वरकों के उत्पादन के लिए किया जाता है, जो देश की ऊर्जा ज़रूरतों में अहम भूमिका निभाती है।

एपीएम गैस की कीमतों में बदलाव और इसका प्रभाव

सरकार ने पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के जरिए नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि 1 अप्रैल 2025 से APM गैस की कीमत को 6.50 डॉलर से बढ़ाकर 6.75 डॉलर प्रति यूनिट (MMBTU) कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब देश पहले ही महंगाई के दबाव में है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) जैसे सरकारी उपक्रमों द्वारा इन क्षेत्रों से गैस का उत्पादन किया जाता है। यह गैस, CNG-PNG के अलावा उर्वरक और बिजली निर्माण में कच्चे माल के रूप में उपयोग होती है।

कीमत तय करने की प्रक्रिया में बदलाव

अप्रैल 2023 में केंद्र सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर APM गैस की कीमत को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के औसत मासिक आयात मूल्य के 10 प्रतिशत पर निर्धारित करने का फैसला किया। साथ ही एक न्यूनतम सीमा 4 डॉलर प्रति MMBTU और अधिकतम सीमा 6.5 डॉलर, जिसे अब 6.75 डॉलर कर दिया गया है, निर्धारित की गई। यह व्यवस्था 2027 तक आंशिक विनियमन के तहत जारी रहेगी, जहां हर साल 0.25 डॉलर प्रति यूनिट की सीमा में इजाफा किया जाएगा।

नई कीमतें कितने समय तक लागू रहेंगी?

1 अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक यह नई सीमा प्रभावी रहेगी। जबकि कच्चे तेल के दामों के आधार पर APM गैस की कीमत 7.26 डॉलर प्रति यूनिट होनी चाहिए थी, लेकिन अधिकतम सीमा के चलते यह 6.75 डॉलर पर रोक दी गई। इसका मतलब यह है कि भले ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम और बढ़ें, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए APM गैस की कीमत इस सीमा से ऊपर नहीं जाएगी।

2023 से पहले कैसे तय होती थीं APM गैस की कीमतें?

अप्रैल 2023 से पहले, इन गैस की कीमतें साल में दो बार यानी छमाही आधार पर तय होती थीं और यह निर्धारण अंतरराष्ट्रीय गैस हब की औसत कीमतों के आधार पर किया जाता था। APM गैस का भारत के घरेलू गैस उत्पादन में 70 प्रतिशत हिस्सा है और शहरी क्षेत्रों में 60 प्रतिशत गैस आपूर्ति APM स्रोतों से होती है।

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