
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में ऐलान किया कि मध्य प्रदेश के धार्मिक शहरों और गांवों में अब शराब की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह फैसला 1 अप्रैल 2025 से लागू हो गया है। पहले भी कुछ क्षेत्रों में शराब पर रोक थी, लेकिन उनकी सीमाएं स्पष्ट नहीं थीं। अब सरकार ने इन क्षेत्रों को पूरी तरह से परिभाषित और घोषित कर दिया है।
कब और कहाँ हुई घोषणा?
यह घोषणा सबसे पहले 24 जनवरी 2025 को महेश्वर में हुई थी, जब वहाँ लोकमाता अहिल्याबाई की नगरी में राज्य कैबिनेट की बैठक हुई थी। वहीं पर मुख्यमंत्री ने यह प्रस्ताव रखा और कैबिनेट ने इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इसके बाद इसे 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया।
किन-किन जगहों पर शराब नहीं बिकेगी?
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की जानकारी के अनुसार, निम्नलिखित नगरों की पूरी सीमा में शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है:
- उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर, ओरछा, मैहर, चित्रकूट, दतिया, पन्ना, मंडला, मुलताई, मंदसौर, अमरकंटक
इसके अलावा, कुछ ग्राम पंचायतें भी पूरी तरह से शराब मुक्त की गई हैं:
- सलकनपुर, कुंडलपुर, बांदकपुर, बरमानकलां, बरमानखुर्द, लिंगा
इन सभी क्षेत्रों को पवित्र स्थल मानते हुए, वहाँ सभी शराब की दुकानें और बार बंद कर दिए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का मानना है कि इन स्थानों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाना बहुत जरूरी है। शराबबंदी का यह फैसला इन धार्मिक स्थलों को शुद्ध और पवित्र बनाए रखने के इरादे से लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जनभावनाओं का सम्मान करती है और यह कदम सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी था।
पहले भी थी शराबबंदी, लेकिन स्पष्ट नहीं थी सीमाएं
कुछ धार्मिक शहरों में पहले भी शराब नहीं बिकती थी, लेकिन समस्या यह थी कि उनकी सीमाएं स्पष्ट नहीं थीं। इससे नियमों का सही पालन नहीं हो पा रहा था। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि किस क्षेत्र में यह प्रतिबंध लागू होगा और किसमें नहीं, जिससे प्रशासनिक तौर पर इसे सख्ती से लागू किया जा सके।
क्या भविष्य में और भी जगहों पर हो सकती है शराबबंदी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संकेत दिया है कि अगर जनभावनाएं और सामाजिक ज़रूरत महसूस हुई तो भविष्य में और धार्मिक स्थानों पर भी शराबबंदी लागू की जा सकती है। सरकार इस विषय पर लोगों की राय और धार्मिक मान्यताओं का पूरा सम्मान करेगी।